यहां आज भी लगता है राजा का दरबार, जमीन पर बैठ खाना खाते हैं महाराज

Sun, 25 Oct 2015 06:14:00 GMT

रायपुर/जगदलपुर। देश में भले ही राजशाही खत्म हो गई है लेकिन भारत में एक इलाका ऐसा है जहां आज भी राजा दरबार लगाकर प्रजा की फरियाद सुनते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं। यह दरबार विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का अभिन्न हिस्सा है जो 'बाहर रैनी' रस्म की 'नवाखाई' रस्म के बाद लगाया जाता है। नवाखाई रस्म में राजा प्रजा के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं। 
 
रविवार को जगदलपुर के सिरहासार भवन में यह दरबार आयोजित किया जाएगा, इसमें सीएम डॉ रमन सिंह, बस्तर महाराज कमल चन्द्र भंजदेव समेत क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
 
बाहर रैनी की रस्म के बाद लगता है दरबार
बस्तर दशहरे में रथ चुराने की भी एक रस्म होती है, इसे 'बाहर रैनी' कहते हैं। बस्तर की माड़िया जनजाति इस रस्म को निभाती है, कहा जाता है कि छः सौ साल पहले जब बस्तर दशहरे की शुरुआत हुई तब माड़िया जनजाति को आयोजन में शामिल नहीं किया गया था। इससे नाराज माड़िया लोगों ने राजमहल से रथ चुरा लिया था और उसे लेकर कुम्हाड़कोट चले गए थे। अगले दिन राजा ने कुम्हाड़कोट जाकर उन्हें मनाया था, उनके साथ भोजन...   Read More...

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